एक
अंग्रेज़ अधिकारी था 'थॉमस मुनरो' वो मद्रास में गवर्नर रहा है। जब वो
गवर्नर था तो भारत के किसी राजा ने उसको शॉल भेंट में दे दिया। जब वो
नौकरी पूरी करके भारत से वापस गया तो लंदन की संसद में सन् 1813 में उसने
अपना बयान दिया। वो कहता है: "
भारत से मैं
एक शॉल लेकर के आया उस शॉल को मैं 7 वर्षों से उपयोग कर रहा हूँ, उसको कई
बार धोया है और प्रयोग किया है उसके बाद भी उसकी क्वालिटी एकदम बरकरार है
और उसमे कहीं कोई सिकुड़न नहीं है। मैंने पूरे यूरोप में प्रवास किया है एक
भी देश ऐसा नहीं है जो भारत की ऐसी क्वालिटी की शॉल बनाकर दे सके। भारत ने
अपने वस्त्र उद्योग में सारी दुनिया का दिल जीत लिया है और भारत के वस्त्र
अतुलित और अनुपमेय मानदंड के हैं जिसमे सारे भारतवासी रोजगार पा रहे हैं।
इस तरह से लगभग 200 से अधिक इतिहासकारों ने भारत के बारे में यही कहा है की
भारत के उद्योगों का, भारत की कृषि व्यवस्था का, भारत के व्यापार का सारी
दुनिया में कोई मुक़ाबला नहीं है।"
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